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रिटायरमेंट के 7 साल बाद भी ढूंढते रहे एक बच्ची को दरोगा जी..166 गुमसुदा लड़कियों में 165 को कर लिया था ट्रेक

न्यूज1express

मुंबई के डी एन नगर पुलिस स्टेशन के सहायक उप-निरीक्षक राजेंद्र ढोंडू भोसले के लिए एक लापता बच्ची का केस इतना पर्सनल बन गया कि रिटायरमेंट के 7 साल बाद भी वह उसे ढूंढते रहे.
अपने रिटायरमेंट के आखिरीसाल भोसले ने उन 166 लड़कियों का केस संभाला जो 2008 से 2015 के बीच लापता हुई थीं. इनमें से 165 को उन्होंने ट्रैक भी कर लिया, लेकिन लड़की नंबर 166 अब भी लापता थी. जिससे भोसले दो साल ड्यूटी के दौरान और 7 साल अपने रिटायरमेंट के बाद भी खोजते रहे, अब लापता होने के 9 साल बाद बच्ची मिली है.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 22 जनवरी, 2013 को लापता हुई लड़की जो उस वक्त सिर्फ सात साल की थी, गुरुवार 4 अगस्त 2022 को वह उसके परिवार से फिर से मिल गई. अब 16 साल की हो चुकी लड़की इतने सालों से अंधेरी (पश्चिम) में अपने घर से 500 मीटर की दूरी पर ही रहती थी. मामले में हैरी जोसेफ डिसूजा (50) को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसकी पत्नी सोनी (37) आरोपी है. दंपति ने कथित तौर पर बच्ची का अपहरण कर लिया क्योंकि वह बच्चा चाहते थे.

खुद का बच्चा हुआ तो बच्ची से कहा- तुझे उठाकर लाए थे
डिसूजा ने पुलिस को बताया कि 22 जनवरी, 2013 को उसने लड़की को स्कूल के पास घूमते देखा था. फिर वहीं से वह उसे अपने साथ ले गया. स्कूल के बाद जब लड़की घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने डीएन नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई और भोसले ने केस को संभाला. वहीं केस दर्ज होने के बाद यह मामला मीडिया, एनजीओ में उछल गया. पकड़ने जाने के डर से उसने लड़की को कर्नाटक में अपने मूल स्थान रायचूर में एक छात्रावास में भेज दिया. इस बीच 2016 में, डिसूजा और सोनी का अपना एक बच्चा हुआ. जिसके बाद वह लड़की को कर्नाटक से वापस ले आए. वह दो बच्चों की परवरिश का खर्च नहीं उठा सकते थे तो उन्होंने बच्ची को एक दाई के रूप में काम करने के लिए लगा दिया. इस दौरन बच्ची के साथ सोनी मारपीट भी करने लगी और उसे कहा जाता था कि उसे 2013 में कहीं से उठा के लाए हैं. इससे बात बच्ची को अहसास हुआ कि वह उसके मां-बाप नहीं है.

ऐसे पहुंची बच्ची अपने परिवार तक
मामले में पुलिस ने बताया कि दंपति को विश्वास था कि अब कोई भी लड़की को पहचान नहीं पाएगा क्योंकि वह बड़ी हो गई है और उसे किसी से भी बात करने से मना किया गया था. उसके लापता पोस्टर भी अब नहीं है. इस बीच एएसआई भोसले बच्ची को खोजते रहे, बीच-बीच में वह उसके घर वालों से मिलते रहते थे. जिस घर में लड़की पिछले सात महीने से दाई का काम कर रही थी, उस घर की घरेलू सहायिका उसकी मदद के लिए आगे आई. एक अधिकारी ने बताया कि उसकी कहानी सुनकर महिला ने लड़की का नाम गूगल कर लिया, 2013 में लापता केस, जैसे डिसूजा ने उल्लेख किया था. “उसने उन अभियानों और लेखों को खोजा जो उसके लापता होने के बाद सामने आए थे.

“इंसानियत रिटायरमेंट के साथ खत्म नहीं होती”
बच्ची के चाचा के मुताबिक, फोटो देखकर लड़की को सब कुछ याद आ गया कि वह उसी मोहल्ले में रहती थी. इससे बाद बच्ची के परिवार से संपर्क किया गया और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. बच्ची मिली तो रिटायर हो चुके अधिकारी भोसले को भी बच्ची के मिलने की जानकारी दी गई फिर बच्ची को उसके घर पहुंचाया गया. 9 साल से लापता बच्ची के मिलने पर भोसले ने कहा कि आप एक पुलिस वाले के रूप में सेवानिवृत्त हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत कुछ ऐसा नहीं है जो सेवानिवृत्ति के साथ समाप्त होता है. यह तब तक है जब तक आप जीवित हैं.

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