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रमजान के पवित्र माह में भूखे प्यासे रहकर रोजा रखने से गरीबों की भूख का होता है एहसास:- इमरान देशभक्त

रुड़की।पवित्र रमजान का चांद कल सऊदी अरब में नजर आने के बाद वहां आज पहला रोजा है।आज यहां भी चांद नजर आने के बाद इस साल के रमजान की शुरुआत कल 25 अप्रैल से होगी।इस दिन से पूरे तीस दिन तक प्रत्येक बालिक मुसलमान को रोजा रखना अनिवार्य होता है।रोजे के दौरान सभी मुसलमान सुबह को सहरी और शाम को इफ्तार खाते हैं।सदियों से मुसलमान हर साल रमजान के पूरे एक महीने के रोजे भूखे-प्यासे रहकर रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं।इस्लाम धर्म के मुताबिक रमजान के महीने को नेकियों,खुद पर संयम और आत्मनियंत्रण का महीना माना जाता है।मान्यता यह भी है कि इस दौरान रोजे रख भूखे रहने से दुनिया भर के गरीब लोगों की भूख और दर्द को भी समझा जा सकता है,क्योंकि तेजी से आगे बढ़ते इस दौर में लोग नेकी और दूसरों के दुख दर्द को भूलते जा रहे हैं।रमजान भी इसी दर्द का एहसास दिलाता है।केवल भूखे रहकर दूसरे के दर्द को समझने के अलावा इस महीने में रोजे को कान,आंख,नाक और जुबान से भी रोजा रखना माना गया है।इस्लाम धर्म के मुताबिक रमजान की मान्यता यह है की रोजेदार ना तो बुरा सुनता है,ना बुरा देखता है,ना बुरा बोला जाता है और ना ही बुराई का एहसास किया जाता है। यह पूरा महीना सब्र और खुद पर नियंत्रण रखने का महीना होता है।रहमानिया मदरसे के प्रधानाचार्य मौलाना अरशद कासमी,मौलाना अजहर उल हक,मदरसा इरफान उल उलूम के मौलाना नसीम अहमद,कासमी मुफ्ती मोहम्मद सलीम,डॉक्टर असलम कासमी,कारी शमीम अहमद,मौलाना मसर्रत अली,शिक्षाविद जीशान अली,अफजल मंगलौरी,मुनव्वर हुसैन,हाजी सलीम खान,जावेद अख्तर एड.,हाजी नौशाद अहमद शेख अहमद जमा तथा मुस्लिम विद्वान डॉक्टर नैयर काजमी का कहना है कि रमजान का महीना रहमतों और बरकतों वाला महीना है और इस महीने में इबादत करने और कुरान पढ़ने का बहुत अधिक सवाब मिलता है।रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है पहले दस दिन को रहमतों का दौर कहा गया है,दूसरे दस दिनों को माफी का दौर और आखिरी के दस दिनों को जहन्नुम से बचाने का दौर कहा गया है।रमजान के महीने में एक दिन शबेकद्र का दिन भी आता है,जो इस बार 19 मई को पड़ रहा है।इस दिन सभी मुसलमान रात भर जाकर अल्लाह की इबादत करते हैं।रोजे के दौरान मुसलमान खानेपीने से दूर रहने के साथ-साथ किसी भी तरह के अपशब्द,गुस्सा और मनोरंजन करने से भी परहेज करते हैं।इस दौरान कुरान शरीफ पढ़कर और सेवा के जरिए अल्लाह को याद करते हैं।रमजान को नेकियों का मौसम बताते हुए उलेमाए लोग कहते हैं कि इस महीने में अधिक से अधिक इबादत कर अपने गुनहो की तौबा करें।इस बार रमजान में चार जुमा आएंगे तथा रमजान का आखिरी जुमा(अलविदा जुमा)22 मई को होगा।

(इमरान देशभक्त,रुड़की)

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