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जीआरपी रुड़की की सतर्कता से तीन नाबालिग सुरक्षित परिजनों से मिले, समय रहते टली अनहोनी

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रुड़की, 5 अगस्त। जीआरपी चौकी रुड़की की तत्परता और सतर्क कार्रवाई से घर से नाराज होकर निकले तीन नाबालिग बच्चों को सकुशल उनके परिजनों से मिलाया गया। पुलिस की सक्रियता से संभावित अनहोनी टल गई और परिजनों ने राहत की सांस ली।
पहली घटना में 4 अगस्त 2026 को कुलदीप पुत्र हरिलाल निवासी सुल्तानपुर जसपुरा (उत्तर प्रदेश) ने चौकी जीआरपी रुड़की पहुंचकर सूचना दी कि उसके दो भतीजे रविंदर (12 वर्ष) पुत्र रामाश्रय निवासी राजपुरा, पंजाब तथा गोलू (11 वर्ष) पुत्र विकी घर से नाराज होकर ऊना पैसेंजर ट्रेन में बैठ गए हैं।
सूचना मिलते ही रात्रि अधिकारी के निर्देश पर जीआरपी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्लेटफॉर्म ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ ऊना पैसेंजर ट्रेन के प्रत्येक कोच की गहन तलाशी ली। काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर चौकी लाया गया, जहां महिला कांस्टेबल बिंदु सैनी की निगरानी में रखा गया। आवश्यक जांच-पड़ताल के बाद दोनों बच्चों को उनके चाचा कुलदीप के सुपुर्द कर सकुशल रवाना किया गया।
इसी दिन दूसरी घटना में प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 पर एक नाबालिग बालक वीरेश लावारिस अवस्था में घूमता मिला। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे सुरक्षित चौकी लाकर महिला कांस्टेबल सरयू सैनी की निगरानी में रखा। पूछताछ में बालक ने बताया कि वह अपने माता-पिता से नाराज होकर घर से चला आया है। पुलिस ने बालक द्वारा बताए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क कर उसके परिजनों को चौकी बुलाया। जांच के बाद बालक को उसके पिता रघुवीर पुत्र तुलाराम निवासी फरीदपुर नगरिया, बरेली (उत्तर प्रदेश) की सुपुर्दगी में सुरक्षित सौंप दिया गया।
इन दोनों सफल अभियानों में एडीएसआई गिरीश चंद्र उनियाल, हेड कांस्टेबल ओमपाल सैनी, हेड कांस्टेबल अनिरुद्ध त्यागी, कांस्टेबल जाहुल हसन मिर्जा, कांस्टेबल अमित कुमार, महिला कांस्टेबल सरयू सैनी, महिला कांस्टेबल बिंदु सैनी सहित गुलमनायक सिद्धार्थ चौधरी, मयंक कुमार, विपिन नेगी एवं गुरुचरण का सराहनीय योगदान रहा।
जीआरपी रुड़की की इस मानवीय एवं त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों और बच्चों के परिजनों ने सराहना करते हुए पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया।

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