लियाक़त कुरैशी
रुड़की ÷ बचपन के दौर में मासूमों को यह जानकारी नहीं होती कि सूरज कि कब निकलता है और कब छिपता है मासूम बच्चे अपने पापा के रोजगार के लिए बैनर लगाकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से गुहार लगा रहे हैं कि हमारे पापा को रोजगार दो, हमारी फीस जमा नहीं हुई है और हमारे घर की स्थिति भी अच्छी नहीं रही है जानकारी हो कि अरुण कुमार सैनी निवासी सलेमपुर राजपूतान रोशनाबाद स्थित होंडा कंपनी में मैकेनिकल के पद पर कार्य करता था अरुण कुमार सैनी का कहना है हौंडा कंपनी अधिकारियों ने झूठे आरोप लगाकर मुझे कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था जब से कंपनी अधिकारियों ने मेरी नौकरी छीनी है दिन पर दिन मेरे घर की हालत बदतर होती जा रही है
उन्होंने कहा मेरे परिवार में मेरे बूढ़े मां बाप है और मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं जिनका पालन पोषण करने में बड़ी दिक्कत सामने आ रही है और बच्चों की आज तक स्कूल फीस भी जमा नहीं हुई है अरुण कुमार सैनी का कहना है घर की स्थिति भी डामाडोल बन गई है जिससे खर्च उठाने में असमर्थ हो रहा हूं जब अरुण कुमार सैनी रोजगार के लिए सरकार से गुहार लगाता थक गया तो अब छोटे मासूम बच्चों को ही बैनर पर लिखकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से रोजगार के गुहार लगानी पड़ रही है देखने में आया है कि अपने बच्चों के लिए पिताजी कुछ न कुछ खाने के लिए लेकर आते है लेकिन यहां उल्टा देखने को मिला है कि मजबूर पिता के लिए छोटे-छोटे बच्चे बैनर पर हमारे पापा को रोजगार दो हमारी स्कूल की फीस भी जमा नहीं है हमारे घर की हालत खराब होती जा रही है जैसी मुहावरे लिखकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से गुहार लगा रहे हैं मजदूर अरुण कुमार सैनी का कहना है मासूम बच्चों की विनती सुनकर भगवान भी करीब आ जाते हैं लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद त्रिवेंद्र सरकार के कानों पर पर्दा पड़ा हुआ है और वह बेरोजगारों को तड़पता देख चैन की नींद सो रहे हैं

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