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टीवी कलाकार शैलश लोढा ने कवियों व शायरों को सुपर स्टार की श्रेणी में ला खड़ा किया= अफजल मंगलौरी

रूडकी।धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ व टीवी शो “वाह भाई वाह” के लोकप्रिय कलाकार एंव प्रसिद्ध कवि शैलेश लोढा को अंतरराष्ट्रीय कवि अफजल मंगलौरी ने रूडकी आने का निमंत्रण दिया है,जिसपर समय निश्चित होने पर वे रुड़की पधारेंगे।गत दिवस मुंबई के गोरेगांव में प्रसिद्ध कवि शैलेश लोढ़ा के लोकप्रिय टीवी शो “वाह भाई वाह” के तीन सौ एपिसोड पूरे होने पर प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कवि व शायर अफजल मंगलौरी को वाह भाई वाह शो का हिस्सा बनाते हुए उनके कई एपिसोड शूट किए गए।कार्यक्रम में लोढ़ा को बधाई देते हुए कहा कि शैलेश लोढ़ा केवल एक लाजवाब कवि,सफल संचालक,बेहतरीन एक्टर और उत्तम परफॉर्मर नहीं,बल्कि अमीर खुसरो से लेकर रविन्द्र जैन तक जितने भी आशुकवि,दार्शनिक और बुद्धिजीवी आये हैं,उन सब की प्रतिभाओं का सम्मिश्रण और समावेश उनके व्यक्तित्व में मौजूद है,जो ईश्वर की देन के साथ-साथ लोढ़ा के अथक परिश्रम का प्रतिफल है।ऐसी प्रतिभाएं सदियों में पैदा होती है।लोढा के सम्मान में अपने विचार प्रकट करते हुए उत्तराखंड सरकार के भाषा विभाग में उर्दू अकादमी के उपाध्यक्ष रहे अफजल मंगलौरी ने कहा कि मुंबई कलाकारों,प्रतिभाओं, रचनाकारों के साथ-साथ हर विधा और हर कला का समुंद्र है,जिसमें केवल रास्ता मिलना ही बहुत बड़ी बात है,मगर शैलेश लोढ़ा ने राजस्थान के एक साधारण से परिवार से आकर अपनी लगन,परिश्रम और अपने जुनून के बल पर अपने अंदर छुपे बहुआयामी व्यक्तित्व को बुलंदी की आखरी मंजिल पहुँचाया,साथ ही हजारों गुमनाम प्रतिभाओं को शोहरत,सम्मान और दौलत की रोशनी देकर इंसानियत और एक सच्चे कलाकार के अर्थ को सार्थक किया।उन्होंने कहा कि गुजरे हुए जमाने में कवियों और शायरों को एक लाचार,गरीब,आवारा,दरिद्र और दया का पात्र समझा जाता था,मगर फिल्मी चकाचोंध और क्रिकेट की आंधी के बीच टेलीविजन के पर्दे पर अपनी अवर्णनीय प्रतिभा के बल पर कवियों और शायरों उन सबके बराबर खड़ा कर उनको सम्मान के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिभर भी बनाया,जो आज के युग में किसी चमत्कार से कम नहीं।अफजल मंगलौरी ने कहा कि ऐसी विलक्षण प्रतिभाएं सदियों में पैदा होती है,जिन पर ईश्वर की अतिविशिष्ट अनुकम्पा होती है।उन्होंने ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के पैंतीस वर्षों में अनेक प्रतिभावान कलाकारों को बहुत नजदीक से देखा मगर एक व्यक्ति में दो या चार विधाओं का रूप देखने को मिला।अनगिनत कलाओं और विधाओं का मजमुआ (समिश्रण) सिवाय शैलेश लोढ़ा के कोई नजर से नहीं गुजरा।इस सब के बावजूद उनकी सादगी,सहजता,मिलनसारीऔर कला को इबादत का दर्जा देना,उनके व्यक्तित्व को उस ऊंचाई तक पहुँचा देता है,जहाँ किसी का पहुँचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।भारत वर्ष के तमाम कवियों व शायरों की ओर से भारत सरकार से मांग की गई कि कला के क्षेत्र में शैलश लोढ़ा को पद्मभूषण देकर उस सम्मान के अर्थ को सार्थक किया जाए ताकि भारत के हर कवि,शायर,कलाकार, बुद्धिजीवी का सिर गर्व से ऊंचा हो सके।इस विशेष कार्यक्रम में अफजल मंगलौरी के अनेक काव्य शो की शूटिंग भी की गई,जो वाह भाई वाह टीवी शो में आने वाले दिनों में शेमेरू टीवी पर प्रसारण किया जाएगा।

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