लियाकत कुरैशी
मंगलौर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी करतार सिंह बढ़ाना ने ग्राम लिब्बरहेड़ी में आयोजित जैविक एवं प्राकृतिक खेती संगोष्ठी में किसानों, कृषि विशेषज्ञों एवं कार्यकर्ताओं के साथ अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
अपने संबोधन में करतार सिंह बढ़ाना ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है तथा किसानों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में जैविक एवं प्राकृतिक खेती एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जैविक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक है, बल्कि इससे उत्पादित फसलें स्वास्थ्य के लिए भी अधिक लाभदायक होती हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की उत्पादन लागत कम हो सकती है और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। उन्होंने किसानों को नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्राप्त कर उन्हें अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
संगोष्ठी के दौरान किसानों ने खेती से संबंधित विभिन्न मुद्दों, जैसे बढ़ती लागत, फसलों की गुणवत्ता, बाजार व्यवस्था और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी जैविक खेती के लाभों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को इसके प्रति जागरूक किया।
करतार सिंह बढ़ाना ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु जैविक एवं प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि कृषि और किसान हितों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया जाता रहेगा तथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में किसानों एवं उपस्थित लोगों ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। संगोष्ठी का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना और उन्हें आत्मनिर्भर एवं लाभकारी खेती की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा उपस्थित किसानों ने इसे ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताया।

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