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नगर पंचायत पिरान कलियर में अनियमितताओं के आरोप, जन अधिकार पार्टी (ज.) ने अधिशासी अधिकारी को हटाने की उठाई मांग

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लियाकत कुरैशी

रुड़की 01 जुलाई 2026: जन अधिकार पार्टी (ज.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद अली ने नगर पंचायत पिरान कलियर में कथित अनियमितताओं एवं अधिशासी अधिकारी कुलदीप चौहान को पद से हटाने की मांग को लेकर शहरी विकास विभाग के अधिकारियों को शिकायत पत्र सौंपा। उन्होंने नगर पंचायत में भ्रष्टाचार, शासकीय धन के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए तथा मामले में कार्रवाई की मांग की।

आज़ाद अली ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत क्षेत्र में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की जा रही हैं, जिनमें अवैध प्लॉटिंग, न्यायालय के आदेशों की कथित अवहेलना तथा सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग जैसे मामले शामिल हैं।

उन्होंने अपने शिकायत पत्र में कई बिंदुओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अवैध प्लॉटिंग क्षेत्रों में प्रॉपर्टी डीलरों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शासकीय धन से सड़क निर्माण कराया गया। इसके अलावा पुराने कर्मचारियों को बिना नोटिस हटाकर नियमों के विपरीत नई नियुक्तियां किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

हैंडपंप टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए दावा किया कि GEM पोर्टल और ई-टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना ऑफलाइन माध्यम से कार्य आवंटित किए गए। साथ ही इस मामले को उजागर करने वाले पत्रकार को कथित रूप से नोटिस देकर दबाव बनाने का प्रयास किए जाने का आरोप भी लगाया।

शिकायत पत्र में यह भी कहा गया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हटाए गए अतिक्रमणों को पुनः स्थापित कराया गया तथा क्षेत्र में अवैध वसूली की जा रही है। इसके अतिरिक्त इंटर कॉलेज के समीप एनजीटी के निर्देशों के विपरीत कूड़ा डंपिंग किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

आज़ाद अली ने कहा कि कुछ कर्मचारियों को कथित रूप से संरक्षण दिया जा रहा है तथा भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2023-24 में नोटिस जारी होने के बावजूद संबंधित मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अपने बयान में उन्होंने कहा कि नगर पंचायत में नियमों और न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने अधिशासी अधिकारी कुलदीप चौहान को तत्काल पद से हटाने, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा उनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों अथवा अधिशासी अधिकारी की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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