लियाकत कुरैशी
रुड़की। कुंजा बहादुरपुर की ऐतिहासिक धरती पर अंग्रेजों की दमनकारी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले अमर शहीद राजा विजय सिंह और सेनापति कल्याण सिंह का बलिदान आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व मंत्री डॉ. गौरव चौधरी ने दोनों वीर सपूतों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि देश की स्वाधीनता और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया, वह भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।
डॉ. गौरव चौधरी ने कहा कि कुंजा बहादुरपुर की ऐतिहासिक धरा वीरता, संघर्ष और बलिदान की गाथा अपने भीतर समेटे हुए है। राजा विजय सिंह और सेनापति कल्याण सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के सामने झुकने के बजाय देश के सम्मान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। उनका सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता रहेगा।
उन्होंने कहा कि “मां भारती की रक्षा और देश के आत्मसम्मान के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद राजा विजय सिंह और सेनापति कल्याण सिंह का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम हम सभी के लिए वंदनीय है। ऐसे वीरों के बलिदान को याद करना और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना हम सबका दायित्व है।”
डॉ. चौधरी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों और ऐतिहासिक वीरों के संघर्ष से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि उनमें राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मसम्मान की भावना मजबूत हो सके। उन्होंने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि वे अमर शहीदों के आदर्शों पर चलने तथा देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लें।
अंत में डॉ. गौरव चौधरी ने अमर शहीद राजा विजय सिंह और अमर शहीद सेनापति कल्याण सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान सदैव देशवासियों के हृदय में जीवित रहेगा।

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