रुड़की, 20 जुलाई 2026। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) रुड़की शाखा ने स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विरोध जताया। इस दौरान आईएमए ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा कि मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटे रहने वाले डॉक्टरों को ड्यूटी के दौरान मारपीट, धमकी और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल चिकित्सकों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है। उनका कहना है कि डॉक्टर पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था और समाज के स्वास्थ्य तंत्र पर हमला है।
प्रेस वार्ता के दौरान आईएमए रुड़की शाखा के अध्यक्ष डॉक्टर संजय गर्ग ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करने, दोषियों के खिलाफ कड़े कानून के तहत त्वरित कार्रवाई और फास्ट ट्रैक अदालतों में मामलों की सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा सभी प्रमुख अस्पतालों को सिक्योरिटी जोन घोषित कर अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने तथा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई।
आईएमए रुड़की शाखा अध्यक्ष डॉ, संजय गर्ग ने कहा कि डॉक्टर अपनी और मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते। संगठन ने सरकार, प्रशासन और आम जनता से चिकित्सकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ संजय गर्ग ने कहा कि पहले एक वक्त ऐसा भी था कि मरीज के परिजन चिकित्सकों का सम्मान करते थे लेकिन आज के समय में यदि मरीज को देखने चार आदमी इकट्ठे आते हैं तो हमें बड़ी फिक्र हो जाती हैं बीते दिनों अस्पताल में हुई मारपीट की घटना को लेकर आईएमए ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार ही पुलिस प्रशासन कार्रवाई करें उन्होंने पुलिस प्रशासन से जांच पड़ताल करने के बाद चिकित्सकों पर कार्रवाही करने की मांग की है उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश में स्पष्ट लिखा है कि किसी व्यक्ति द्वारा अस्पताल के अंदर की गई तोड़,फोड़ या किसी चिकित्सक और स्टाफ के साथ मारपीट की घटना को अंजाम देता है तो संबंधित धाराओं में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाही होनी चाहिए।

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