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हादसे के बाद जागा परिवहन विभाग! कार्रवाई से ज्यादा जरूरी है हादसों की रोकथाम तीन मौतों के बाद कार्रवाई, सवाल—लापरवाही से दौड़ते बड़े वाहनों पर कब कसेगा शिकंजा नगला इमरती हादसे के बाद की कार्रवाई केवल ई-रिक्शाओं तक सीमित रहेगी या तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वाले बड़े वाहनों पर भी लगातार शिकंजा कसा जाएगा?

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रुड़की। नगला इमरती क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हादसे में तेज रफ्तार कार की ई-रिक्शा से जोरदार टक्कर के बाद ई-रिक्शा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। हादसे में ई-रिक्शा में सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य यात्री घायल हुए थे।
हादसे के बाद परिवहन विभाग की ओर से ई-रिक्शाओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की चर्चा के बीच लोगों का सवाल है किu यदि वाहनों की जांच और नियमों के पालन की कार्रवाई नियमित रूप से होती, तो क्या ऐसी स्थिति आने का इंतजार करना जरूरी था?

क्या सिर्फ ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई से खत्म होगी समस्या?

सड़क सुरक्षा को लेकर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल ई-रिक्शाओं को सीज करने से सड़क हादसों की समस्या का समाधान हो जाएगा? सड़कों पर तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाने, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले बड़े वाहनों पर भी लगातार कार्रवाई की जरूरत है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर चलने वाले सभी प्रकार के वाहनों की समान रूप से जांच होनी चाहिए। खासकर उन वाहनों पर निगरानी जरूरी है जो तेज रफ्तार या लापरवाही से चलते हुए दूसरे राहगीरों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं।

 

हादसे के बाद कार्रवाई या नियमित व्यवस्था?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिवहन विभाग की कार्रवाई केवल किसी बड़े हादसे के बाद ही क्यों दिखाई देती है? यदि फिटनेस, परमिट, ओवरलोडिंग, गति सीमा और यातायात नियमों की नियमित जांच होती रहे तो नियम तोड़ने वाले वाहन पहले ही कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
लोगों का कहना है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने से ज्यादा जरूरी हादसे से पहले रोकथाम की व्यवस्था मजबूत करना है।

रिक्शा चालकों के सामने रोजगार का संकट

दूसरी ओर, ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई का सीधा असर उन चालकों पर भी पड़ता है जिनकी रोजी-रोटी इसी काम से जुड़ी है। यदि किसी चालक का वाहन नियमों का उल्लंघन करता है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि सभी वाहनों और वाहन चालकों के लिए नियमों का समान रूप से पालन कराया जाए।
अब सवाल यह है कि क्या नगला इमरती हादसे के बाद की कार्रवाई केवल ई-रिक्शाओं तक सीमित रहेगी या तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वाले बड़े वाहनों पर भी लगातार शिकंजा कसा जाएगा?
सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है कि कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले दिखाई दे।

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